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Friday, March 15, 2019

इस मंदिर में पानी का दीपक जलाकर भक्त मांगते हैं मन्नत

हमारे भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जहां आज भी चमत्कार देखने को मिलते हैं और इन चमत्कारों की वजह से ही एक भक्त का विश्वास अपने भगवान पर और बढ़ जाता है। इन मंदिरों में कई ऐसे राज छुपे हुए हैं जिन्हें अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलक्षा पाए हैं और ऐसा ही एक अनसुलक्षा राज है कालीसिंध नदी के किनारे बना माता का मंदिर। इस मंदिर में घी या तेल का दीपक नहीं बल्कि पानी का दीपक जलाया जाता है। इस मंदिर की यही अनोखी विशेषता है जिससे भक्तों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। इस मंदिर में मन्नत का दीपक जलाने के लिए घी-तेल की जरुरत नहीं होती, बल्कि पानी का ही दीया जलाकर लोग अपनी मन्नत मांगते हैं। इस मंदिर में ऐसा पिछले 5 सालों से चलता आ रहा है। 



गड़ियाघाट वाली माँ के नाम से जाना जाने वाला यह मंदिर मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में कालीसिंध नदी के तट पर बना हुआ है। मंदिर में दीपक जलाने के लिए मन्दिर के पास उपस्थित कालीसिंध नदी से पानी लाया जाता है। ये दीपक बरसात के मौसम में नहीं जलता क्योंकि बरसात के कारण कालीसिंध नदी का जल का स्तर बढ़ जाता है जिससे मंदिर पानी में डूब जाता है जो दीपक को बुझा देता है। बरसात खत्म होने के बाद इस दीपक को दोबारा शारदीय नवरात्र के पहले दिन जलाते हैं जो फिर दोबारा बारिश होने तक जलता है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि पहले इस मंदिर में तेल का दीपक जलता था। लेकिन लगभग पांच साल पहले माता ने सपने में मुझे दर्शन दिए और कहा कि तुम अब पानी का दीपक जलाओ। माता का आदेश मानकर मैंने पानी का दीपक जलाया जो जलने लगा। तभी से मां के चमत्कार से यह दीपक जल रहा है।


Saturday, February 23, 2019

राजा विक्रमादित्य ने की थी इस मंदिर की स्थापना

शनिवार के दिन शनिदेव के दर्शन करने से सारे कष्ट दूर होते हैं और पूजा करने से शनि ढय्या खत्म होती है। वैसे तो शनिदेव के कई सारे मंदिर हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है जिसकी कई सारी विशेषताएं। यह मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के पट पर यह नवग्रह शनि मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने 2 हजार साल पहले की थी। राजा विक्रमादित्य ने मंदिर बनाने के बाद यही से विक्रम संवत की शुरुआत की थी। 



यह एक ऐसा मंदिर जहां शिव के रूप में शनि विराजित हैं और लोग मनोकामना पूर्ण करने के लिए यहां तेल चढ़ाते हैं। जिन लोगों पर शनि की ढय्या का प्रभाव होता है, वे ढय्या शनि को तेल चढ़ाते हैं। शनि की साढ़ेसाती और अन्य समस्याओं के लिए शनि की मुख्य प्रतिमा की पूजा की जाती है। शनि अमावस्या के दिन इस मंदिर में भीड़ लग जाती है और भक्त शनिदेव को तेल चढ़ाते हैं। मंदिर में इतनी भीड़ हो जाती है कि लोगों को दर्शन करने भी मुश्किल होते हैं। इसलिए लोगों को आसानी से दर्शन हो सकें, मंदिर के बाहर एलईडी डिस्प्ले की व्यवस्था की गई है।