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Saturday, June 15, 2019
Friday, June 14, 2019
शुक्रवार को माँ संतोषी का कवच करने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है
बन्दौं संतोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार।
ध्यान धरत ही होत नर दुख सागर से पार॥
भक्तन को संतोष दे संतोषी तव नाम।
कृपा करहु जगदंबा अब आया तेरे धाम॥
जय संतोषी मात अनुपम। शांतिदायिनी रूप मनोरम॥
सुंदर वरण चतुर्भुज रूपा। वेश मनोहर ललित अनुपा॥
श्वेतांबर रूप मनहारी। मां तुम्हारी छवि जग से न्यारी॥
दिव्य स्वरूपा आयत लोचन। दर्शन से हो संकट मोचन॥
जय गणेश की सुता भवानी। रिद्धि-सिद्धि की पुत्री ज्ञानी॥
अगम अगोचर तुम्हरी माया। सब पर करो कृपा की छाया॥
नाम अनेक तुम्हारे माता। अखिल विश्व है तुमको ध्याता॥
Wednesday, June 5, 2019
Tuesday, May 28, 2019
जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।
अर्थ: सज्जन की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना चाहिए। तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी मयान का – उसे ढकने वाले खोल का।
Wednesday, May 22, 2019
कबीर दास जी दोहे
अर्थ: कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है। यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है
Tuesday, May 21, 2019
अर्थ: बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुँच गए, पर सभी विद्वान न हो सके। कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा।
Saturday, May 18, 2019
कबीर दास जी दोहे
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।
अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला। जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है।
तामस
तनु कछु साधन नाहीं। प्रीत न पद सरोज मन माहीं॥
अब
मोहि भा भरोस हनुमंता। बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता॥
मेरा तामसी
(राक्षस)शरीरहोनेसेसाधनतोकुछबनतानहींऔरनमनमेंश्रीरामचंद्रजी
के
चरणकमलों
में
प्रेम
ही
है,
परंतुहेहनुमान्!अबमुझेविश्वासहोगयाकिश्रीरामजीकीमुझपरकृपाहै,क्योंकिहरिकीकृपाकेबिनासंत
नहीं
मिलते
Thursday, May 16, 2019
|| महा मृत्युंजय मंत्र ||
ॐ
त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीयमामृतात् !!
हे तीन आँखो वाले
महादेव, हमारे पालनहार, पालनकर्ता कृपा कर हमें इस दुनिया के मोह एवम माया के बंधनों एवम जन्म
मरण के चक्र से मुक्ति दीजिए जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बिना किसी यत्न के डाल से
अलग हो जाता है |
Labels:
OMSANATAN,
shrimad bhagwat katha
Location:
Uttar Pradesh, India
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